अंतरात्मा
मेरी अंतरात्मा ने ही मुझे हमेशा कविता लिखने की प्रेरणा दी| ये सभी कविताये मेरे मन के ही भाव हैं| मेरे हिसाब से कविता के द्वारा हम संसार के सुख, दुःख,आनन्द और क्लेश को यथार्थ रूप से अनुभव कर सकते हैं।कविता से मन: स्थिति अभिव्यक्त होती है ।सृष्टि के व्यव्हार या मनुष्य की मनोदशा को कविता इस तरह व्यक्त करती है, मानो वह सब नेत्रों के सामने नाच रहा हो।उनकी उत्तमता या अनुत्तमता का विवेचन करने में बुद्धि से काम लेने की जरूरत नहीं पड़ती। कविता की प्रेरणा से मनोवेगों के प्रवाह जोर से बहने लगते हैं।
सोमवार, 1 फ़रवरी 2021
मंगलवार, 1 दिसंबर 2020
शनिवार, 5 सितंबर 2020
रविवार, 21 जून 2020
पापा ...
आज फादर्स डे के दिन मुझे लगा की आज पिता जी, जिनको हम प्यार से पापा कहते हैं , पर कुछ लिखा जाए और उनको उपहार स्वरुप सुनाया जाए पर थोड़ी देर बाद समझ आया की पिता जी पर लिखना उनके जैसा ही
कठिन है. मैंने कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं, उम्मीद करती हूँ की आप सभी को भी पसंद आएगी.मंगलवार, 16 जून 2020
वो माँ बाप ही तो होते हैं
सभी को नमस्कार.....
आज बहुत वक़्त बाद कुछ आप सभी के साथ शेयर करने का दिल किया....शुक्रवार, 22 मई 2020
कौन समझे पीर परायी.....
किसी ने सच ही कहा....
कौन समझे पीर परायी.....
आज की परिस्तिथियों को कुछ
शब्दों में बांधने की कोशिश की है... ये दर्द शायद इतने गहरे हैं कि शब्दों में
बांध पाना मुश्किल है, जो महसूस कर पायी उसको
प्रस्तुत करने की कोशिश की है... आप सभी को मेरे शब्दों में उन बेबस लोगों का दर्द
महसूस हो तो मुझे comment
box में
ज़रूर बताएं.... और अगर मुझसे कहीं गलती हुई हो तो उसे भी जरूर बताएं ये मुझे आगे
बहुत ध्यान दिलाएगा....
कविता का शीर्षक कौन समझे
पीर परायी लिखा है जो कि सच है... हम उस दर्द को देख पाते पर ना उसे बांट पाते हैं
ना उसे कम कर पाते....
कुछ बोल इस तरह है....
रविवार, 10 मई 2020
मेरी माँ..
मेरा मजहब मेरी माँ....मेरी इबादत मेरी माँ....
पहली ख्वाईश मेरी माँ...ख्वाबों की चाहत मेरी माँ....
तू ही समझे हर दर्द मेरा...मेरे सपनों की चादर मेरी माँ...
मुझसे ही तेरा हँसना रोना..मेरे पंखों की उड़ाने मेरी माँ....
मंगलवार, 7 अप्रैल 2020
वक़्त वक़्त की बात
"समय कठिन ज़रूर है, पर बहुत कीमती है"
बस इसी बात को अपनी कुछ पंक्तियों में पिरोने का प्रयास किया है मैंने...शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2020
ऐसे ही चलना सिखा दिया.......
सिखा दिया मुझे यूं ही अंजानो से दिल लगाना |
और वो औरो का बदले मैं मुझे प्यार दिलाना भूल गया ||
आज खुश हूँ कि जानती हूँ सच्चाई इस ज़माने की |
गिरते सँभालते मैंने भी जानी है कीमत दिल लगाने की ||
मुस्कुराते हुए ही अब गुजरने लगी हूँ गम की गलियों से मैं |
और वो मुझे फूलो से हटा काटों पर चलना सीखा गया ||
ऐ खुदा मेरे ये जज्बात , ये मुहब्बत बनायीं ही क्यू ?
ये मिलना , ये बिछड़ना , ये सौगात ही क्यू ?
किसी को कुछ नहीं तो किसी को जिंदगी बना दिया |
तूने हर मोड़ जीवन मैं ऐसे ही चलना सिखा दिया ||
ऐसे ही चलना सिखा दिया.......
गुरुवार, 30 जनवरी 2020
यही है जिंदगी...
सभी को नमस्कार.....
रविवार, 1 दिसंबर 2019
आखिरी दर्द
ज्यादा कुछ कहने का दिल नहीं शायद वो दर्द आज हर इंसान महसूस कर रहा होगा जो उस भारत माँ की बेटी का आखिरी दर्द था....
उसके दर्द और आज के हालात पर कुछ पंक्तियाँ लिख रही हूँ... कुछ गलत लिख गयी हूँ अगर आक्रोश में आकर तो सभी से क्षमा मांगती हूँ...
पसंद आए तो इस बार like करने के लिए ना कहूँगी बस शेयर करें और हर घर तक पहुंचाए.... इस दर्द को हम कुछ कम कर सकते हें एक दूसरे से बाँट के...
गुरुवार, 15 अगस्त 2019
राखी की डोर
आप सभी को स्वतंत्रता दिवस और रक्षा बंधन की ढ़ेरों शुभकामनाएं...
आज ये दोनो ही पर्व बहुत ही खास हैं... जो भी भाई हमारे हमसे दूर हैं.... देश की सीमा पर हमारी रक्षा कर रहे हैं... उन सभी को भी मेरी तरफ से रक्षा बंधन की शुभकामनाएं.आज कुछ पंक्तियां मैं अपने भाइयों और उन सभी भाइयों को समर्पित करना चाहती हूँ जो अपनी बहन से दूर हैं...
आशा है आप सभी को पसंद आयेगी अपना कुछ वक़्त निकाल कर इसे दिल से पढें...
शुक्रवार, 26 जुलाई 2019
बारिश की बूंदें
बात जब बरसात की हो तो दिल खुश हो ही जाता है.... हजारों एहसास और हजारों उम्मीद जगा जाती है....
कुछ पल बारिश की बूंदो को हथेली में महसूस करके देखिये दिल खुश हो जायेगा...कुछ पक्तियां उस एहसास को प्रदर्शित करने के लिए लिखी हैं आशा है आपको पसंद आएगा अपने विचार जरूर रखें...
शुक्रवार, 28 जून 2019
गाँव की वो शाम अब कहाँ
सभी को मेरा अभिवादन....
आज पुराने बीते हुए पलों को याद करके अपने गाँव के बारे में कुछ लिखने का मन हुआ... पुरानी यादों और बदले हुए वक़्त को कुछ पंक्तियों में पिरोया है...आप सभी को पसंद आए तो अपने विचार जरूर लिखें पसंद करने के साथ साथ... मेरे इस प्रयास को बढ़ाने के लिए अपना योगदान जरूर दें...
गाँव की वो शाम अब कहाँ.....
गुरुवार, 20 जून 2019
घर आये नन्हे कदम
आज हमारे परिवार में एक नन्हे कदम का आगमन हुआ, पूरे परिवार की तरफ से अनाविल के आगमन पर कुछ पक्तियां लिख रही हूँ
रविवार, 12 मई 2019
माँ
माँ भगवान का वो रूप है जिसको वो वरदान है कि वो एक नई जिंदगी दे सकती है.... और हम सभी उसी ज़िंदगी को जी रहे हें... उनके प्रति इस कृतज्ञता को कुछ पंक्तियों में व्यक्त कर रही हूं..... और ये कविता हर माँ और उसके प्यार को समर्पित
गुरुवार, 9 मई 2019
जिंदगी के बनते बिगड़ते रंग
सभी को मेरा प्यार भरा नमन.....
आज हम जो जिंदगी जी रहे हैं वो सच कितनी है और झूठ कितनी है ये ना खुद समझ पा रहे हैं ना किसी को समझा पा रहे हैं....शनिवार, 23 मार्च 2019
वक़्त का गुज़रना
ये वक़्त का गुज़रना कुछ इस तरह होता है कि शाख से पत्ते सूख के गिर जाना और नयी कोपल का फिर से शाख पर आ जाना.....
यही नियम है जीवन का भी....अपनी इस कविता में वक़्त को कुछ शब्दों में पिरोने की कोशिश की है.....
रविवार, 10 मार्च 2019
असर दुआओं का
अक्सर गिर कर फिर से संभल जाती हूँ मैं
लगता है किसी की दुआओं का असर है.....
भीड़ में तन्हा होकर भी मुस्कुराती हूं मैं
लगता है किसी की दुआओं का असर है.....
गुरुवार, 21 फ़रवरी 2019
तुम भूल न जाना उनको
आज फिर कुछ लिखने का मन हुआ......उनकी शहादत पर चंद पंक्तियाँ पेश कर रही हूं.....
पसंद आए तो अपनी आंखों को बंद कर उनको नमन करें.....
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" समय कठिन ज़रूर है , पर बहुत कीमती है" बस इसी बात को अपनी कुछ पंक्तियों में पिरोने का प्रयास किया है मैंने... आशा करती हूं आप ...
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माँ भगवान का वो रूप है जिसको वो वरदान है कि वो एक नई जिंदगी दे सकती है.... और हम सभी उसी ज़िंदगी को जी रहे हें... उनके प्रति इस कृतज्ञता क...

















