रविवार, 21 जून 2020

पापा ...

 आज फादर्स डे के दिन मुझे लगा की आज पिता जी, जिनको हम प्यार से पापा कहते हैं , पर कुछ लिखा जाए और उनको उपहार स्वरुप सुनाया जाए पर थोड़ी देर बाद समझ आया की पिता जी पर लिखना उनके जैसा ही 

कठिन है. मैंने कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं, उम्मीद करती हूँ की आप सभी को भी पसंद आएगी. 

मंगलवार, 16 जून 2020

वो माँ बाप ही तो होते हैं

 सभी को नमस्कार.....

आज बहुत वक़्त बाद कुछ आप सभी के साथ शेयर करने का दिल किया....
कभी कभी बैठ कर ये सोचती हूँ की माँ बाप अपने बच्चो के लिए कितना करते हैं.... उसको शब्दों मैं लिख पाना कठिन है पर फिर भी मैंने कोशिश की.  

शुक्रवार, 22 मई 2020

कौन समझे पीर परायी.....

 

किसी ने सच ही कहा....
कौन समझे पीर परायी.....

आज की परिस्तिथियों को कुछ शब्दों में बांधने की कोशिश की है... ये दर्द शायद इतने गहरे हैं कि शब्दों में बांध पाना मुश्किल है, जो महसूस कर पायी उसको प्रस्तुत करने की कोशिश की है... आप सभी को मेरे शब्दों में उन बेबस लोगों का दर्द महसूस हो तो मुझे comment box में ज़रूर बताएं.... और अगर मुझसे कहीं गलती हुई हो तो उसे भी जरूर बताएं ये मुझे आगे बहुत ध्यान दिलाएगा....

कविता का शीर्षक कौन समझे पीर परायी लिखा है जो कि सच है... हम उस दर्द को देख पाते पर ना उसे बांट पाते हैं ना उसे कम कर पाते....

कुछ बोल इस तरह है....

रविवार, 10 मई 2020

मेरी माँ..

मेरा मजहब मेरी माँ....मेरी इबादत मेरी माँ....
पहली ख्वाईश मेरी माँ...ख्वाबों की चाहत मेरी माँ....

तू ही समझे हर दर्द मेरा...मेरे सपनों की चादर मेरी माँ...
मुझसे ही तेरा हँसना रोना..मेरे पंखों की उड़ाने मेरी माँ....



मंगलवार, 7 अप्रैल 2020

वक़्त वक़्त की बात

 "समय कठिन ज़रूर है, पर बहुत कीमती है"

बस इसी बात को अपनी कुछ पंक्तियों में पिरोने का प्रयास किया है मैंने... 
आशा करती हूं आप सभी को पसंद आएगा... अपने विचारों को मुझसे साँझा ज़रूर करें.... 
मुझे ये प्रोत्साहन देगा और आगे इसी तरह लिखते रहने की हिम्मत....  

शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2020

ऐसे ही चलना सिखा दिया.......

 सिखा दिया मुझे यूं ही अंजानो से दिल लगाना  | 

और वो औरो का बदले मैं मुझे प्यार दिलाना भूल गया || 


आज खुश हूँ कि जानती हूँ सच्चाई इस ज़माने की | 

गिरते सँभालते मैंने भी जानी है कीमत दिल लगाने की  || 


मुस्कुराते हुए ही अब गुजरने लगी हूँ गम की गलियों से मैं  | 

और वो मुझे फूलो से हटा काटों पर चलना सीखा गया   || 


ऐ खुदा मेरे ये जज्बात , ये मुहब्बत बनायीं ही क्यू ?

ये मिलना , ये बिछड़ना , ये सौगात ही क्यू ?


किसी को कुछ नहीं तो किसी को जिंदगी  बना दिया | 

तूने हर मोड़ जीवन मैं ऐसे ही चलना सिखा दिया  || 

ऐसे ही चलना सिखा दिया.......  

गुरुवार, 30 जनवरी 2020

यही है जिंदगी...

सभी को नमस्कार.....

आज बहुत वक़्त बाद कुछ आप सभी के साथ शेयर करने का दिल किया.... ज़िंदगी को अपनी कुछ lines में लिखने की कोशिश की है... अगर पसंद आए तो अपने विचार जरूर लिखें....
 

रविवार, 1 दिसंबर 2019

आखिरी दर्द

सभी को नमस्कार.....
ज्यादा कुछ कहने का दिल नहीं शायद वो दर्द आज हर इंसान महसूस कर रहा होगा जो उस भारत माँ की बेटी का आखिरी दर्द था....
उसके दर्द और आज के हालात पर कुछ पंक्तियाँ लिख रही हूँ... कुछ गलत लिख गयी हूँ अगर आक्रोश में आकर तो सभी से क्षमा मांगती हूँ...

पसंद आए तो इस बार like करने के लिए ना कहूँगी बस शेयर करें और हर घर तक पहुंचाए.... इस दर्द को हम कुछ कम कर सकते हें एक दूसरे से बाँट के...

 

गुरुवार, 15 अगस्त 2019

राखी की डोर

 आप सभी को स्वतंत्रता दिवस और रक्षा बंधन की ढ़ेरों शुभकामनाएं...

आज ये दोनो ही पर्व बहुत ही खास हैं... जो भी भाई हमारे हमसे दूर हैं.... देश की सीमा पर हमारी रक्षा कर रहे हैं... उन सभी को भी मेरी तरफ से रक्षा बंधन की शुभकामनाएं.
आज कुछ पंक्तियां मैं अपने भाइयों और उन सभी भाइयों को समर्पित करना चाहती हूँ जो अपनी बहन से दूर हैं...
आशा है आप सभी को पसंद आयेगी अपना कुछ वक़्त निकाल कर इसे दिल से पढें...
 

शुक्रवार, 26 जुलाई 2019

बारिश की बूंदें

 बात जब बरसात की हो तो दिल खुश हो ही जाता है.... हजारों एहसास और हजारों उम्मीद जगा जाती है....

कुछ पल बारिश की बूंदो को हथेली में महसूस करके देखिये दिल खुश हो जायेगा...
कुछ पक्तियां उस एहसास को प्रदर्शित करने के लिए लिखी हैं आशा है आपको पसंद आएगा अपने विचार जरूर रखें...

शुक्रवार, 28 जून 2019

गाँव की वो शाम अब कहाँ

 सभी को मेरा अभिवादन....

आज पुराने बीते हुए पलों को याद करके अपने गाँव के बारे में कुछ लिखने का मन हुआ... पुरानी यादों और बदले हुए वक़्त को कुछ पंक्तियों में पिरोया है...
आप सभी को पसंद आए तो अपने विचार जरूर लिखें पसंद करने के साथ साथ... मेरे इस प्रयास को बढ़ाने के लिए अपना योगदान जरूर दें...

गाँव की वो शाम अब कहाँ.....
 

गुरुवार, 20 जून 2019

घर आये नन्हे कदम

 आज हमारे परिवार में एक नन्हे कदम का आगमन हुआ, पूरे परिवार की तरफ से अनाविल के आगमन पर कुछ पक्तियां लिख रही हूँ

रविवार, 12 मई 2019

माँ

 माँ भगवान का वो रूप है जिसको वो वरदान है कि वो एक नई जिंदगी दे सकती है.... और हम सभी उसी ज़िंदगी को जी रहे हें... उनके प्रति इस कृतज्ञता को कुछ पंक्तियों में व्यक्त कर रही हूं..... और ये कविता हर माँ और उसके प्यार को समर्पित 

गुरुवार, 9 मई 2019

जिंदगी के बनते बिगड़ते रंग

 सभी को मेरा प्यार भरा नमन.....

आज हम जो जिंदगी जी रहे हैं वो सच कितनी है और झूठ कितनी है ये ना खुद समझ पा रहे हैं ना किसी को समझा पा रहे हैं.... 
सोशल मीडिया पर जिंदगी इतना व्यस्त हो गयी है कि जो सच में गुज़र रहा है वो अनदेखा हो रहा है.... हम सेल्फी लेते वक़्त मुस्कुराते है दुनिया से अपने गम छिपाते हें... हज़ार फ़िल्टर को लगा के फिर एक झूठी मुस्कान सामने लाते हें.. कहाँ तक ये सही है ये तो अपने में ही जांचने का विषय है....

इसी ज़िन्दगी के रंगों पर आज कुछ पंक्तियाँ लिखने का अवसर मिला... पसंद आए तो अपने विचार जरूर बताएं...

आप सभी का अभिवादन... 

शनिवार, 23 मार्च 2019

वक़्त का गुज़रना

 ये वक़्त का गुज़रना कुछ इस तरह होता है कि शाख से पत्ते सूख के गिर जाना और नयी कोपल का फिर से शाख पर आ जाना..... 

यही नियम है जीवन का भी....

अपनी इस कविता में वक़्त को कुछ शब्दों में पिरोने की कोशिश की है..... 
पसंद आए तो प्रोत्साहन की आशा रखती हूं...... 

रविवार, 10 मार्च 2019

असर दुआओं का

 दुआ असर तो करती है कभी दिखता है कभी छिप जाता है कहीं....

आज उन छिपी हुई दुआओं का फर्ज़ अदा करने का प्रयास किया है.... आशा करती हूँ आप सभी को पसंद आएगा.....

अक्सर गिर कर फिर से संभल जाती हूँ मैं
लगता है किसी की दुआओं का असर है.....
भीड़ में तन्हा होकर भी मुस्कुराती हूं मैं
लगता है किसी की दुआओं का असर है..... 

गुरुवार, 21 फ़रवरी 2019

तुम भूल न जाना उनको

आज फिर कुछ लिखने का मन हुआ......

उनकी शहादत पर चंद पंक्तियाँ पेश कर रही हूं.....
पसंद आए तो अपनी आंखों को बंद कर उनको नमन करें.....

नई दिशा