शनिवार, 23 मार्च 2019

वक़्त का गुज़रना

 ये वक़्त का गुज़रना कुछ इस तरह होता है कि शाख से पत्ते सूख के गिर जाना और नयी कोपल का फिर से शाख पर आ जाना..... 

यही नियम है जीवन का भी....

अपनी इस कविता में वक़्त को कुछ शब्दों में पिरोने की कोशिश की है..... 
पसंद आए तो प्रोत्साहन की आशा रखती हूं...... 

रविवार, 10 मार्च 2019

असर दुआओं का

 दुआ असर तो करती है कभी दिखता है कभी छिप जाता है कहीं....

आज उन छिपी हुई दुआओं का फर्ज़ अदा करने का प्रयास किया है.... आशा करती हूँ आप सभी को पसंद आएगा.....

अक्सर गिर कर फिर से संभल जाती हूँ मैं
लगता है किसी की दुआओं का असर है.....
भीड़ में तन्हा होकर भी मुस्कुराती हूं मैं
लगता है किसी की दुआओं का असर है..... 

नई दिशा