ये वक़्त का गुज़रना कुछ इस तरह होता है कि शाख से पत्ते सूख के गिर जाना और नयी कोपल का फिर से शाख पर आ जाना.....
यही नियम है जीवन का भी....अपनी इस कविता में वक़्त को कुछ शब्दों में पिरोने की कोशिश की है.....
पसंद आए तो प्रोत्साहन की आशा रखती हूं......
मेरी अंतरात्मा ने ही मुझे हमेशा कविता लिखने की प्रेरणा दी| ये सभी कविताये मेरे मन के ही भाव हैं| मेरे हिसाब से कविता के द्वारा हम संसार के सुख, दुःख,आनन्द और क्लेश को यथार्थ रूप से अनुभव कर सकते हैं।कविता से मन: स्थिति अभिव्यक्त होती है ।सृष्टि के व्यव्हार या मनुष्य की मनोदशा को कविता इस तरह व्यक्त करती है, मानो वह सब नेत्रों के सामने नाच रहा हो।उनकी उत्तमता या अनुत्तमता का विवेचन करने में बुद्धि से काम लेने की जरूरत नहीं पड़ती। कविता की प्रेरणा से मनोवेगों के प्रवाह जोर से बहने लगते हैं।
ये वक़्त का गुज़रना कुछ इस तरह होता है कि शाख से पत्ते सूख के गिर जाना और नयी कोपल का फिर से शाख पर आ जाना.....
यही नियम है जीवन का भी....अपनी इस कविता में वक़्त को कुछ शब्दों में पिरोने की कोशिश की है.....