रविवार, 12 मई 2019

माँ

 माँ भगवान का वो रूप है जिसको वो वरदान है कि वो एक नई जिंदगी दे सकती है.... और हम सभी उसी ज़िंदगी को जी रहे हें... उनके प्रति इस कृतज्ञता को कुछ पंक्तियों में व्यक्त कर रही हूं..... और ये कविता हर माँ और उसके प्यार को समर्पित 

गुरुवार, 9 मई 2019

जिंदगी के बनते बिगड़ते रंग

 सभी को मेरा प्यार भरा नमन.....

आज हम जो जिंदगी जी रहे हैं वो सच कितनी है और झूठ कितनी है ये ना खुद समझ पा रहे हैं ना किसी को समझा पा रहे हैं.... 
सोशल मीडिया पर जिंदगी इतना व्यस्त हो गयी है कि जो सच में गुज़र रहा है वो अनदेखा हो रहा है.... हम सेल्फी लेते वक़्त मुस्कुराते है दुनिया से अपने गम छिपाते हें... हज़ार फ़िल्टर को लगा के फिर एक झूठी मुस्कान सामने लाते हें.. कहाँ तक ये सही है ये तो अपने में ही जांचने का विषय है....

इसी ज़िन्दगी के रंगों पर आज कुछ पंक्तियाँ लिखने का अवसर मिला... पसंद आए तो अपने विचार जरूर बताएं...

आप सभी का अभिवादन... 

नई दिशा