माँ भगवान का वो रूप है जिसको वो वरदान है कि वो एक नई जिंदगी दे सकती है.... और हम सभी उसी ज़िंदगी को जी रहे हें... उनके प्रति इस कृतज्ञता को कुछ पंक्तियों में व्यक्त कर रही हूं..... और ये कविता हर माँ और उसके प्यार को समर्पित
मेरी अंतरात्मा ने ही मुझे हमेशा कविता लिखने की प्रेरणा दी| ये सभी कविताये मेरे मन के ही भाव हैं| मेरे हिसाब से कविता के द्वारा हम संसार के सुख, दुःख,आनन्द और क्लेश को यथार्थ रूप से अनुभव कर सकते हैं।कविता से मन: स्थिति अभिव्यक्त होती है ।सृष्टि के व्यव्हार या मनुष्य की मनोदशा को कविता इस तरह व्यक्त करती है, मानो वह सब नेत्रों के सामने नाच रहा हो।उनकी उत्तमता या अनुत्तमता का विवेचन करने में बुद्धि से काम लेने की जरूरत नहीं पड़ती। कविता की प्रेरणा से मनोवेगों के प्रवाह जोर से बहने लगते हैं।
रविवार, 12 मई 2019
गुरुवार, 9 मई 2019
जिंदगी के बनते बिगड़ते रंग
सभी को मेरा प्यार भरा नमन.....
आज हम जो जिंदगी जी रहे हैं वो सच कितनी है और झूठ कितनी है ये ना खुद समझ पा रहे हैं ना किसी को समझा पा रहे हैं....सोशल मीडिया पर
जिंदगी इतना व्यस्त हो गयी है कि जो सच में गुज़र रहा है वो अनदेखा हो रहा है....
हम सेल्फी लेते वक़्त मुस्कुराते है दुनिया से अपने गम छिपाते हें... हज़ार फ़िल्टर
को लगा के फिर एक झूठी मुस्कान सामने लाते हें.. कहाँ तक ये सही है ये तो अपने में
ही जांचने का विषय है....
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