सिखा दिया मुझे यूं ही अंजानो से दिल लगाना |
और वो औरो का बदले मैं मुझे प्यार दिलाना भूल गया ||
आज खुश हूँ कि जानती हूँ सच्चाई इस ज़माने की |
गिरते सँभालते मैंने भी जानी है कीमत दिल लगाने की ||
मुस्कुराते हुए ही अब गुजरने लगी हूँ गम की गलियों से मैं |
और वो मुझे फूलो से हटा काटों पर चलना सीखा गया ||
ऐ खुदा मेरे ये जज्बात , ये मुहब्बत बनायीं ही क्यू ?
ये मिलना , ये बिछड़ना , ये सौगात ही क्यू ?
किसी को कुछ नहीं तो किसी को जिंदगी बना दिया |
तूने हर मोड़ जीवन मैं ऐसे ही चलना सिखा दिया ||
ऐसे ही चलना सिखा दिया.......

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